Monday, 10 April 2017

बहस का दंगल

मानव विकास क्रम में विचारों का बहुत महत्वपूर्ण स्थान रहा है । मनुष्य ने अपने सामने पेश आई चुनौतियों का, समस्याओं का समाधान अनेक ढंग से ढ़ूंढा  है । हर समय की अपनी समस्याएं  ,अपने प्रश्न रहे हैं, उस समय की चुनौतियों ने मनुष्य को विचार करने, चिंतन, मनन करते रहने को बाध्य किया । उसी विचारों के विवेचन से  समाज चेतना और विकास के धरातल पर आगे बढ़ता रहा । यहाँ यह बात भी ध्यान देने की है कि हर समय, परिस्थिति व क्षेत्र विशेष की समस्याएं भी अलग-अलग होने से उनका हल भी अलग -अलग तरीके से ही हुआ ।
      आज हम उस दौर से बहुत आगे निकल आये हैं । विश्व के अलग-अलग क्षेत्रों, परिस्थितियों व समय पर किए गए प्रयास सब हमारे  सामने हैं  । यह धर्म, शिक्षा, संस्कृति, नैतिकता के रूप में अपने - अपने  दृष्टिकोण को प्रस्तुत करते हैं  । दूसरी ओर विज्ञान व तकनीक के प्रसार व व्यापक उपयोग ने हमें बहुत अधिक सुविधाभोगी, शक्तिशाली, संसाधन सम्पन्न बना दिया है ।विज्ञान  की चमत्कारपूर्ण शक्ति के बलबूते इस धरती के परे के ग्रहों, नक्षत्रों की विशद खोज ,कृत्रिम मेधाशक्ति से संचालित कृत्रिम मानव (रोबोट ) ,यहाँ तक की प्रयोगशाला में नये जीव के विकास तक की संभवनाओं के  साथ -साथ मनुष्य की जीवनी शक्ति कोभी श्रेष्ठतर करने के प्रयासों ने  ,जीवन की बेहतरी के नये आयाम दिए हैं । यह असीमित संभावनाओं के द्वार ,नये नये  विचारों के साथ पुरानी मान्यताओं, दृष्टिकोणों, नैतिकमूल्यों विश्वासों पर भी  चोट करते  नजर आ रहे हैं ।आज हर तरफ़, हर तरह के विचारों, मूल्यों, मान्यताओं का विश्लेषण किया जा रहा है ।

     आज बहुत तीव्रगति के संचारमाध्यमों के  कारण विचारों का आदान -प्रदान बड़ी सरलता से ,विस्फोटक रूप  से संभव हुआ है । आज यह बहस या संवाद के रूप में विभिन्न विचारधाराओं के संगम के समान एक साथ हमारे सामने आ जाता है । विचारों की विविधता निश्चित रूप से हमारी संकुचित दृष्टि को व्यापक आयाम देती है । विचारों के खुले विमर्श से एक सुंदर, खुशहाल जीवन की संभावना नज़र आती है ।जितना ज्यादा विविधता,  विरोधी विचारों पर खुल कर मंथन करने का मौका मिलेगा उतना ही  सशक्त  और सबल हमारा मानव समाज होगा ।
   
     आज वैश्विकरण के युग में सब को साथ लेकर चलना होगा  । विचार - विनिमय परस्पर मैत्री भाव को  बनाए रखने में सबसे अधिक कारगर है परन्तु दुख तो यह है कि आज भी बहस से, संवाद से  लोग कतराते दिखाई देते हैं ।हह एक यही मानकर चलता है कि बस बह जो  कह रहा है, सोच रहा है  ,बस बही सत्य है । उसे ही दूसरों को भी  मानना चाहिए । उसका अपना विश्वास ही सही है । यही नहीं जोर-जवर तरीके अपना कर अपनी बातों को मनवाना चाहते हैं । ऐसे लोगों की दृष्टि में बाकी सभी दृष्टिकोण गलत ही नहीं, खुराफाती, निंदनीय, भ्रष्ट करने बाले हैं । इस तरह की  सोच दमनकारी रूप धारण कर, उन्मादी  ,आतंकी विचारों से पोषित होने के कारण समाज में उपद्रवकारी रूप में सामने आकर वैमनस्य फैलाने का कारण बनती है ।
 
     आज आदमी को जरुरत है कि बह बिना किसी एक विचारधारा से  प्रभावित होकर जिए । शायद मुश्किल है, क्योंकि जीने के लिए हमें एक सहारा चाहिए । हम अपने आप को अकेला, अक्षम, निरीह समझ कर किसी के बताये मार्ग पर चलना चाहते हैं । एक पथप्रदर्शक, एक मसीहा  जिसके पीछे -पीछे अंधे की तरह चलते रहें, जैसे हमारे पूर्वज चलते रहे  । हमारा अपने पर विश्वास नहीं है । यह सोच ही हमें एक बाड़े में शामिल कर देता है । यह फिर धर्म, जाति, पूंजीवाद, समाजवाद, साम्यवाद, समतावाद, गांधीवाद, आदी कुछ भी हो सकता है । ओशो ने कहा है, " सभी विचारधाराऐं निश्चित ही युद्ध पैदा करती हैं यहाँ तक की 'शाँति ' पर आधारित, 'शाँति के लिए  ' भी  तो  युद्ध किया जाता है । तो फिर शांति कैसे आसकती  है ? शांति तब ही स्थापित  हो सकती है जब हम सभी विचारधाराओं की मूर्खता को समझकर उसका त्याग कर सकें! "
   

Tuesday, 20 December 2011

BEING A CHILD AGAIN

After crossing sixtees  iam enjoying my childhood again. Its a new jeewan. The sages search to find 'WHO AM I'/I am related myself with acheldren academy.Enjoyig with them intheir innocence. It is just like sensetising myself in the company of small boys and girls.Each moment intheir company isanew experience.anew learning.a small bubbly kid rushes  me to help him inhis peeing another time one came with her tiffin .EACH MOMENT BRINGS ANEW JOY. Anew love starts flowing in me.Ifeel anew birth.Iwent there to teach them but in an amazing way they are teaching me.I dont know how to react this situation.I SAW INNOCENCE FACES .I deeply meditate over WHY SOCITY WANTS TOSTUFF THEM WITH ALL SORT OF BORISH KNOWLEDGE/?Adam had his end by taking the fruit of KNOWLEDGE TREEAs OSHO the great mystic of our time has said--- the child brought with him the greatest tresure ,the treasure that sagesfind afterarduous effort.,but socitey .parentes, the people surrounding him crushed it ,destroyed it.'THIS REMOVES HIS SIMPLICITY.Droping knowledge and forgeting all man made moral .philosphy,religious  do's and do.'nts make us again achijd that wemissed in our yrsteyears. THINK OVER IT.